नोएडा

सोसायटी की दीवार से गिरा प्लास्टर, आवाज उठाई तो मिला नोटिस

ग्रेटर नोएडा की रक्षा एडेला सोसायटी में प्लास्टर गिरने की जानकारी सोशल मीडिया पर साझा करने वाले निवासी को एओए ने नोटिस जारी किया। निवासी ने इसे तानाशाही करार दिया।

Reported by Shagun Chaurasia and edited by Shagun Chaurasia

AOA Notice Controversy: ग्रेटर नोएडा वेस्ट की एक आवासीय सोसायटी में सुरक्षा संबंधी मुद्दा उठाने वाले निवासी को नोटिस मिलने के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है। मामला रक्षा एडेला सोसायटी का है, जहां हाल ही में प्लास्टर गिरने की घटनाओं के बाद एक निवासी ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा की थी। इसके कुछ दिनों बाद ही उन्हें अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन (AOA) की ओर से कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया।

सुरक्षा पर उठे सवाल

सोसायटी निवासी राहुल राज का कहना है कि बुधवार और बृहस्पतिवार को परिसर में प्लास्टर गिरने की दो घटनाएं सामने आई थीं। घटना के बाद कई निवासियों ने सुरक्षा को लेकर चिंता जताई और इसकी शिकायत एओए से की। राहुल के मुताबिक, उन्होंने मामले को संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने और त्वरित कार्रवाई की मांग के लिए सोशल मीडिया का भी सहारा लिया। इसके अलावा कुछ निवासी जिलाधिकारी मेधा रूपम से मिलने भी पहुंचे थे।

नोटिस पर नाराजगी

राहुल का आरोप है कि उन्होंने केवल निवासियों की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा उठाया था, लेकिन इसके बदले उन्हें नोटिस थमा दिया गया। उनका कहना है कि यदि किसी संभावित खतरे की जानकारी सार्वजनिक की जाती है तो उसे गलत नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने एओए के रवैये को अनुचित बताते हुए इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर दबाव बनाने की कोशिश करार दिया।

एओए का जवाब

दूसरी ओर, एओए का पक्ष अलग है। एओए सचिव अंजनी कुमार पांडेय द्वारा जारी नोटिस में कहा गया है कि सोसायटी से संबंधित कुछ जानकारियां बिना पूरी पुष्टि के सार्वजनिक मंचों और मीडिया में साझा की गईं, जिससे सोसायटी की प्रतिष्ठा प्रभावित हुई है। नोटिस में संबंधित निवासी से एक सप्ताह के भीतर स्पष्टीकरण देने को कहा गया है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर एसोसिएशन अपने अधिकारों के तहत आगे की कार्रवाई कर सकती है।

विवाद पर बढ़ी बहस

एओए का कहना है कि सोसायटी में लगभग 900 परिवार निवास करते हैं और बड़ी संख्या में लोगों ने यहां अपनी जीवनभर की कमाई निवेश की है। ऐसे में किसी भी सूचना को सार्वजनिक करने से पहले उसे एसोसिएशन या मेंटेनेंस टीम के समक्ष रखना अधिक उचित होगा। फिलहाल, यह मामला सुरक्षा संबंधी चिंताओं और निवासियों की अभिव्यक्ति के अधिकार के बीच संतुलन को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है।

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